केरल का वह कॉम्युनिस्ट नाविक कांग्रेसी भी है और भाजपाई भी

हम नाव पर बैठे ही थे कि नाविक ने सवाल किया, ‘आपने ब्रेकफ़ास्ट किया?’ सवाल जायज़ था और ज़रूरी भी क्योंकि दिन के साढ़े नौ बज रहे थे और अगले दो घंटे हमें पानी के बीच ही रहना था जहाँ हमें कुछ नहीं मिलना था। हमने कहा, ‘हाँ, खाकर आए हैँ।’

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पतंजलि नर्सरी में वह बुजुर्ग

हरिद्वार के पास पतंजलि हर्बल गार्डन। शाम के 6 बजे हैं। अंधेरा होने को है। गार्डन के औषधीय पौधों, झरने, गुफा, तालाब, बर्ड हाउस और ट्री हाउस का आनंद लेने के बाद हम वहाँ की नर्सरी में थे।

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केरल का जटायु पर्वतः कभी सुना है इस जगह के बारे में

फुर्सत मिले तो केरल जटायु अर्थ सेंटर घूमने चला जाए। कोई फिल्मकार ही जटायु को इस तरह याद कर सकता है।

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क्या आपने प्राकृतिक स्वास्थ्यवर्धक पेय- नीरा पीया है?

देशभर के गांधी आश्रमों में कभी अलसुबह नीरा मिल जाया करता था। अब मिलता है या नहीं? नीरा तोडी के पेड़ से निकाला जाता है, प्राकृतिक तरीके से।

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इस रिसॉर्ट में करिए 2 दिन का सफर, ये है पूरी itinerary, खर्च होंगे सिर्फ 2200 रुपये

एक घर हो पहाड़ों के बीच, सामने से सूरज की लालिमा बिखर रही हो, खिड़की पर बैठी चिड़िया जैसे कानों में आकर कुछ कहकर भाग जाना चाहती हो. सामने तलहटी में एक नदी हो और पगडंडी हरियाली से भरी हो… ये चित्र आप और हम बचपन में किताबों में खूब देखते रहे होंगे और ऐसी जगह जाने का हमारा मन भी खूब करता रहा है.

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कॉर्पोरेट जॉब छोड़कर OLD MANALI में बस गई ये मॉडर्न लड़की

5 साल बिना किसी रुकावट के यात्रा करना, अडवेंचर वाली बस यात्रा, ट्रेन के सफर का आनंद लेना, गुमनाम गांव में घूमना और कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक सैंकड़ों लोगों के घरों में रहने के बाद हर किसी का मन हो जाएगा कि वो किसी पहाड़ पर अपना छोटा सा कॉटेज बनाकर रहे।

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1200 किमी का सफ़र अपनी बुलेट के साथ (दिल्ली से गया)

हमेशा की तरह इस बार भी होली में घर नहीं जा सका. मलाल तो था, मगर मज़बूरी थी. ख़ैर, इस बार चुनाव के कारण रामनवमी में घर जाना भी असंभव लग रहा था.

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8 जगहें जहां दिल्लीवाले एक दिन की छुट्टी बिता सकते हैं

दिल्लीवालों के लिए 2 चीजें काफी मशहूर होती है एक तो खाने का शौक और दूसरा घूमना। दिल वाले लोग अक्सर घूमने और खाने के लिए बेचैन रहते हैं। वो घूमने के शौकीन तो होते हैं साथ ही काफी व्यस्त भी रहते हैं तो ऐसे में दिल्लीवाले ये नहीं जान पाते कि एक दिन की छुट्टी में कहां घूमने के लिए जाएं।

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आखिर ये Homestay है क्या और यहां क्यों ठहरना चाहिए

भारत में एक कहावत बहुत ही ज्यादा मशहूर है, अतिथि देवो भव:, जिसका मतलब होता है कि मेहमान भगवान का रूप होता है। हम भारतीय इस कहावत को सच भी मानते हैं, और मेहमाननवाजी में कभी कोई कमी ना रह जाएं इसकी पूरी कोशिश भी करते हैं।

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अप्रैल में घुमक्कड़ी के लिए यें हैं TOP 5 DESTINATIONS

अप्रैल का महीना छुट्टियों का और रिलैक्स करना के महीने के रूप में देखा जाता है। इस महीने में बच्चे अपनी परिक्षाओं से फ्री हुए होते हैं, ऐसे में मां-बाप बच्चों को घुमाने की योजना बनाते हैं। जिसमें वो चाहते हैं कि 1-2 दिन वो अपने बच्चों के साथ कहीं घूम कर आए और बच्चों का मूड फ्रेश हो जाए।

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