Agumbe Hill Station : यह है दक्षिण भारत का चेरापूंजी, खुलकर लें मजा

Agumbe Hill Station : इस बार मानसून के साथ बारिश ने जमकर दस्तक दी है। ऐसे में भला किसका मन नहीं करेगा कहीं ऐसी जगह जाने का जहां मन आनंदित हो उठे और मस्ती में झूम उठे। ऐसी ही मन को मंत्र मुग्ध करने वाली जगह है अगुम्बे, ( Agumbe ) ये कर्नाटक का एक गांव है। यहाँ से आप प्रकृति की सुन्दरता को बहुत करीब से देख सकते हैं।

कहां पर स्थित है अगुम्बे

ये स्थल अपने शांत वातावरण और हरियाली के लिए जाना जाता है। ये राज्य के शिमोगा जिले में स्थित अगुम्बे समुद्र तल से 2725 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

ये है दक्षिण भारत का चेरापूँजी

यहाँ बारिश अत्यधिक होती है। साल भर भारी बारिश होने के कारण इस स्थान को दक्षिण का चेरापूंजी भी कहा जाता है।

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अगुम्बे के पास के दार्शनिक स्थल

अगर आप अगुम्बे घूमने जाते हैं तो वहां आस-पास और भी बहुत कुछ है देखने को यहाँ कई झरने है, जैसे कि बरकना झरना, कुंचिकल झरना, ओनांक अबी झरना, जोगीगुंडी झरना और कोडलु तीर्था झरना। उडपी रेलवे स्टेशन अगुम्बे के लिए सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन माना जाता है। यात्रियों के लिए यहाँ पर यात्री घर की सेवा उपलब्ध है।

पर्यटकों के लिए खास है सनसेट पॉइंट

अगुम्बे स्थित सूर्यास्त प्वाइंट को पर्यटन के लिहाज से काफी खास माना जाता है। अगुम्बे के सूर्यास्त पॉइंट की गिनती दुनिया के खास सूर्यास्त प्वाइंट में होती है। अगर बेस्ट सनसेट व्यू प्वाइंट को शामिल किया जाए तो उसमें अगुम्बे का नाम उल्लेख जरूर किया जाएगा। पश्चिमी घाटों की उच्चतम चोटियों में से एक चोटी पर बसा ये स्थान अरब सागर में सूर्यास्त के अद्भत दृश्यों को देखने का मौका देता है। सूर्य का रंग अनेक रंगों में घुलकर सागर अद्भुत सौंदर्यता का लिबास ओढ लेता है। सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य देखने लायक होता है। सच में इन दृश्यों को देखना किसी के लिए भी एक शानदार अनुभव होगा। ये प्वाइंट अगुम्बे गांव से लगभग 10 मिनट के पैदल रास्ते पर स्थित है।

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अगुम्बे को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें

अगुम्बे के घने जंगलों में कई प्रकार के पशु प्राणी भी आपको देखने को मिलेंगें। यहां पर कई प्रकार कि जड़ीबूटियाँ और वनस्पति भी पाई जाती हैं। यही कारण है कि भारत सरकार ने “अगुम्बे रैन फ़ॉरेस्ट रिसर्च स्टेशन” की स्थापना की है। अगुम्बे कुल 3 वर्ग कि. मी में फैला है। इसकी जनसँख्या 500 से भी कम है। यहाँ के लोग अपना गुजारा सुपारी बागानों या जंगल में पैदा होने वाली चीजों से अपना जीवनयापन करते हैं। अगुम्बे अपनी सुन्दरता के साथ-साथ ट्रैकिंग के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ पर आपको सबसे विषैला सांप किंग कोबरा भी देखने को मिल जायेगा।

एक संत के कारण इस झील का नाम पड़ा जोगिगुंडी फॉल्स

यहां पानी बड़े ही आराम से नीचे की ओर गिरता है जो नीचे इकट्ठा होकर एक तालाब बनाता है। सैलानियों को यहां आकर स्नान करना बहुत पंसद है। इस तालाब में स्नान कर सैलानी आनंद का अनुभव करते हैं। पर्यटक चाहें तो इस तालाब में स्नान कर सकते हैं। यहां से आपको आस-पास के जलप्रपात का नजारा बेहद खूबसूरत दिखेगा। भारत के अन्य छोटे जलप्रपातों की तुलना में जोगिगुंडी फॉल्स एक ऐसा फॉल है जहां आपको सालभर पानी देखने को मिलेगा। ज्यादातर जलप्रपातों की सैर मानसून के दिनों में ही की जाती है लेकिन आप यहां किसी भी समय आ सकते हैं। अधिक वर्षा होने के कारण यहां आपको पानी हर महीने भरा हुआ ही मिलेगा। इसका कारण है यहां पूरे साल भारी बारिश होना। इस जलप्रपात को जोगी इसलिए कहा जाता है क्योकि इसी स्थान पर कभी किसी संत ने कई सालों तक ध्यान लगाया था। इस जलप्रपात की एक अद्वितीय विशेषता यह भी है कि यहां का पानी गुफा से निकलता है इस कारण इसे गुफा झरना भी कहा जाता है।

कब जाएं अगुम्बे

यहां पर झमाझम बारिश होने की वजह से आप यहां जुलाई से सितंबर छोड़कर कभी भी जा सकते हैं।

कैसें पहुंचे अगुम्बे

अगुम्बे शिमोगा, उडपी, और मंगलौर से करीब 40 मिनट की दूरी पर स्थित है। आप यहाँ से कोई भी बस पकड़कर बस द्वारा भी यहाँ पहुँच सकते हैं। बंगलुरु से अगुम्बे जाने के लिए यात्रियों के लिए कई सरकारी बसों की सेवा उपलब्ध है।

Anchal Shukla

मैं आँचल शुक्ला कानपुर में पली बढ़ी हूं। AKTU लखनऊ से 2018 में MBA की पढ़ाई पूरी की। लिखना मेरी आदतों में वैसी शामिल है। वैसे तो जीवन के लिए पैसा महत्वपूर्ण है लेकिन खुद्दारी और ईमानदारी से बढ़कर नहीं। वो क्या है किमैं लोगों से मुलाक़ातों के लम्हें याद रखती हूँ,मैं बातें भूल भी जाऊं तो लहज़े याद रखती हूँ,ज़रा सा हट के चलती हूँ ज़माने की रवायत से,जो सहारा देते हैं वो कंधे हमेशा याद रखती हूँ।कुछ पंक्तिया जो दिल के बेहद करीब हैं।"कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हँसे हम रोयेऐसी करनी कर चलो, हम हँसे जग रोये"