Buddhism Prayer Flags : सिर्फ बाइक पर ही लगाते हैं या इनका महत्व भी पता है?

Buddhism Prayer Flag | Buddhist Prayer Flag Importance | Significance of Buddhism Prayer Flag | Buddhism Prayer Flags | Why Travellers Love Buddhism Flag | देश में ट्रैवलर्स में एक क्रेज है. भारत में ट्रैवलर्स बौद्ध धर्म (Buddhism) के अलग अलग रंग के ध्वज को अपने वाहनों पर लगाना काफी पसंद करते हैं. दो ट्रैवलर्स ऐसा करते हैं उसमें से कुछ तो इसके पीछे की वजह जानते हैं लेकिन ज्यादातर ऐसा सिर्फ शानपट्टी और स्टाइल के मारे करते हैं. क्या आपने कभी ये सोचने की कोशिश की है कि इस बौद्ध ध्वज ( Buddhism Prayer Flags ) के पीछे की वजह क्या है जो लोगों को इसे यूं गाड़ी-बाइक पर लगाने का चलन तेज हो गया है.

हिमालय की वादियों के साथ साथ देशभर में घूमते हुए आपने कुछ रंग बिरंगे खूबसूरत झंडे हवा में लहराते हुए दिखाई दिए होंगे. बहुत सी गाड़ियों और बाइकों पर भी आपको कुछ ऐसे ही छोटे छोटे, रंग बिरंगे झंडे देखने को मिलते होंगे, जिनपर कुछ मंत्र अंकित रहते हैं. कई घरों और रेस्तरां में भी आपको यह देखने को मिलते होंगे. उन झंडों को देख कर आपको लगता होगा कि वो झंडे फेंसी सजावट का सामान है लेकिन आपको यह जान कर बहुत हैरानी होगी कि उन झंडों का बौद्ध धर्म (Buddhism) में आध्यात्मिक महत्व है.

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बौद्ध धर्म (Buddhism) में उनको प्रार्थना के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसलिए उनको प्रार्थना ध्वज कहा जाता है. उन झंडों पर लिखे मंत्र से लेकर उनके रंग तक हर चीज़ का एक गहरा अर्थ है. असल में बौद्ध धर्म (Buddhism) में मान्यता है कि ये प्रार्थना झंडे अनिवार्य रूप से हवा के माध्यम से हमारी प्रार्थनाओं को आगे तक ले जाते हैं. माना जाता है कि ये झंडे हवा के माध्यम से वातावरण में शांति, दया, शक्ति और बुद्धिमत्ता को फैलाते हैं, जिसके कारण हर तरफ सकारात्मकता प्रवाहित होती है.

लेह-लद्दाख में ये झंडे भारी संख्या में लगे होते हैं. उसके अलावा कई पहाड़ी क्षेत्रों में भी ये झंडे लगे मिलते हैं. भारत ही नहीं बल्कि नेपाल, भूटान और कई बुद्धिस्ट देशों में भी ये प्रार्थना ध्वज मिलते हैं.

प्रार्थना ध्वज के बारे में कुछ आवश्यक बातें हैं जो सबको नहीं पता.

ऐसा कहा जाता है कि सबसे पहला प्रार्थना झंडा गौतम बुद्ध के द्वारा इस्तेमाल किया गया था जिनकी शिक्षा के बाद ही बौद्ध धर्म (Buddhism) की नींव रखी गयी थी.

इन झंडों पर लिखी प्रार्थनाएं भगवान तक पहुंचाने के लिए नहीं होती बल्कि ऐसा कहा जाता है कि ये प्रार्थनाएं हवा के माध्यम से सारे ब्रह्मांड में फैल कर विश्व शांति स्थापित करेंगी.

झंडे का हर रंग कुछ कहता है. ये झंडे लाल, नीले, पीले, सफेद और हरे रंग के होते हैं. ये सभी रंग किसी न किसी तत्व के प्रतीक हैं. लाल रंग अग्नि का प्रतीक है, नीला हवा का, पीला रंग पृथ्वी का, सफेद हवा का और हरा पानी का प्रतीक है. ये झंडे उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और केंद्र दिशा का प्रतिनिधित्व भी करते हैं.

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झंडों पर लिखे मंत्र का विशेष अर्थ है. इन झंडों पर संस्कृत में एक मंत्र लिखा होता है जिसका विशेष अर्थ है. ये मंत्र है- ‘ ओ३म मणि पद्मे हुम्’। ओ३म पवित्र शब्दांश है, मणि का अर्थ है गहना, पद्मे का मतलब कमल, हूम का अर्थ है ज्ञान की भावना. अर्थात पथ के अभ्यास पर निर्भरता में जो विधि और ज्ञान का एक अविभाज्य संघ है, आप अपने अशुद्ध शरीर, भाषण और दिमाग को शुद्ध शरीर और ऊंचे भाषण में बदल सकते हैं. बताया जाता है कि जो कोई इस मंत्र को जपता है वह सब ख़तरों से सुरक्षित हो जाता है.

बौद्ध धर्म (Buddhism) में ऐसी मान्यता है कि जब भी हवा चलती है इन मंत्रों की सकारात्मकता सभी क्षेत्रों में प्रवाहित होती है. इसलिए इन झंडों को हमेशा ऊँचाई पर बाँधा जाता है.

इन झंडों को घर और दुकान में लगाना भी शुभ माना जाता है.

उपहार के रूप में ये झंडे मिलना अच्छा माना जाता है.

इन झंडों को लगाने के लिए आपका बुद्धिस्ट होना ज़रूरी नहीं है. इन झंडों को कोई भी लगा सकता है बस लगाने वाले की भावना अच्छी होनी चाहिए. इनको लगाने का एक ही मकसद होना चाहिए और वो है अच्छी भावनाएं और सकारात्मकता को फ़ैलाना.

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मुख्य रूप से ये झंडे दो प्रकार के होते हैं- लुंगता और दार्चो। हॉरिजोंटल रूप वाले झंडे लुंगता कहलाते हैं और वर्टिकल वाले दार्चो कहलाते हैं.

ज़मीन पर इन झंडो को रखना इन झंडो का अनादर माना जाता है इसलिए इनको हमेशा ऊँचाई पर बाँधा जाता है.

अगर इन झंडो का रंग उड़ता है तो कहा जाता है कि हमारी प्रार्थना स्वीकार हो गई है.

इन झंडों को लगाने का उत्तम समय चीनी नव वर्ष माना जाता है.

तो अब जब आपको प्रार्थना झंडों के बारे में काफ़ी कुछ पता चल गया है तो अब इनको सिर्फ़ सजावटी समान न समझ कर प्रयोग में लाया जाए.