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Kartikey Swami Temple Uttarakhand | Ganesha and Kartik Bhagwan | Kartikeya Bhagwan | Shankar Bhagwan Son kartikey | Bhagwan Kartikeya ka Mandir – Hello दोस्तों मेरा नाम ऋषभ है और मैं उत्तराखंड के चमोली जिले का रहने वाला हूँ. वैसे तो हम उत्तराखंड को देव भूमि के नाम से भी जानते हैं और साथ ही साथ चार धाम की नगरी के नाम से भी जानते हैं. उत्तराखंड में आपको कई पौराणिक मंदिर और ऐतिहासिक जगह भी मिल जाएगी देखने को. पूरे भारत में और विश्व में उत्तराखंड को यहां की संस्कृति और यहां की सभ्यता के लिए जाना जाता है. यही कारण है कि आज उत्तराखंड को देश-विदेशों में खूब जाना जाता है.
वही, आज मैं आपको बताने वाला हूं, यहां के एकमात्र ऐसे मंदिर के बारे में जो आपको पूरे उत्तराखंड में कहीं दूसरी जगह देखने को नहीं मिलेगा. वैसे तो एक मंदिर को हम दूसरी जगह में उसी नाम से बना हुआ भी देख सकते हैं परंतु उत्तराखंड में ये एक इकलौता ऐसा मंदिर ( Kartikey Temple ) है जो मात्र एक ही है और इन देवता का कोई दूसरा मंदिर पूरे उत्तराखंड में कहीं भी देखने को नहीं मिलेगा.
दोस्तों मैं बात कर रहा हूं भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय के मंदिर ( Kartikey Temple ) के बारे में. जो पूरे उत्तराखंड में इकलौता ऐसा मंदिर है जो उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के कनक चोरी गांव से क्रोध पर्वत पर स्थित है. कहीं भी भगवान कार्तिकेय का दूसरा मंदिर नहीं बना हुआ है. इसके चारों तरफ हिमालय की चोटियां बर्फ से ढकी रहती हैं. यही यहां का सबसे प्रसिद्ध और इकलौता मंदिर है जो भगवान कार्तिक का है और एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है.
स्थानीय लोगो का मानना है कि भगवान कार्तिकेय आज भी क्रोध पर्वत पर जागृत रूप में तपस्या करते हैं. इस मंदिर ( Kartikey Temple ) के द्वार बारह महीनों पर्यटकों के लिए खुले रहते हैं. वहीं यहां से प्रकृति को भी आप बड़ी ही खूबसूरती के साथ अपनी नज़रों से निहार सकते हैं. यह उत्तराखंड की प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक होने के साथ-साथ दैविक भी माना जाता है. यहां लोग अपनी मन्नत और मुरादों को पूरा करने की मांग को भगवान कार्तिकेय के इस दिव्य मंदिर में रखते हैं. मुराद पूरी होने पर घंटी और अपनी इच्छा अनुसार भेट चढ़ाते हैं.
वहीं, रुद्रप्रयाग उत्तराखंड के पांच प्रयागों में से एक है और यह भी यहां के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल में से एक है. अगर मैं बात करूँ तो यहां हर साल लाखों से भी ज्यादा पर्यटक अपना वीकेंड मनाने आते है. वही कार्तिकेय स्वामी का मंदिर ( Kartikey Temple ) काफी ऊंचाई पर होने के कारण ट्रैकिंग स्पॉट के रूप में भी चर्चा में रहता है.
पहाड़ी होने के नाते भी और मेरी अपनी राय के अनुसार आपसे यह कहना बनता है कि यदि आप रुद्रप्रयाग आयें तो यहां का क्षेत्रीय खाना ज़रूर खायें. यहां का क्षेत्रीय खाना है “कोदे की रोटी और उसके साथ हरी-भरी पालक और सरसों की सब्जी, साथ में वाइट बटर मिल जाये तो समझ लेना कि पहाड़ी सफर पूरा हो गया.
लोक-कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव और माता पार्वती के साथ अपने पुत्र गणेश और कार्तिकेय के साथ बैठे हुए थे, तभी कुछ बातों के उपरांत भगवान शिव गणेश और कार्तिकेय से कहते हैं कि जो भी तुम दोनों में से ब्रह्माण्ड के तीन चक्कर पूरे कर हमारे सामने आएगा उसको सर्वप्रथम पूजा जाने का वरदान प्राप्त होगा. भगवान गणेश माता पार्वती को प्रकृति और भगवान शिव को ब्रह्माण्ड मान कर, चक्कर पूरा करते हैं. इस बात पर वे भगवान शिव-पार्वती के तीन चक्कर काट सर्वप्रथम पूजा जाने का वरदान प्राप्त कर लेते हैं. वहीं जब भगवान कार्तिकेय जब विश्व भ्रमण कर लौटे तो सारी घटना को देख बहुत क्रोधित हो उठे.
उन्होंने अपने शरीर का मांस अपनी माता पार्वती को सौंप दिया और अपने शरीर की हड्डियां पिता शिव को सौप कर क्रोध में कैलाश छोड़ कर क्रोध पर्वत पर आत्मा रूप जा पहुंचे, तभी से यहां ये कार्तिक स्वामी का पूजन किया जाता है.
कैसे-पहुँचे
दिल्ली से पहले आपको कश्मीरी गेट से देहरादून या ऋषिकेश आना होगा. फिर वही यहां से आपको रुद्रप्रयाग के लिए बस सुविधा उपलब्ध होगी. वहीं ये बस आपको उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के बस स्टॉप तक ले जायेगी. रुद्रप्रयाग से आपको कनक चोरी गांव के लिए जीप मिल जायेगी जो कि आपसे मात्र 50 रुपये तक का ही किराया लेगी. यहां से आगे मंदिर का सफर आपको पैदल ही करना पड़ेगा.
यदि आप रुद्रप्रयाग जायें तो कार्तिक स्वामी मंदिर ज़रूर जायें. यह आपके लिए अडवेंचर से भरा सफर होगा. अगर आपको सोलो ट्रिप यानि कि अकेले घूमने का शैक है तो आपके लिए ये एकदम परफेक्ट जगह होने वाली है. तो आल दा बेस्ट आपकी वाली जर्नी के लिए। आप अपनी राय हमको ज़रूर कमेंट बॉक्स में लिखे।
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