इस आर्टिकल में, हम आपको मेहंदीपुर बालाजी ( Mehandipur Balaji ) में मौजूद एक और धार्मिक जगह के बारे में बताने जा रहे हैं. ये धार्मिक जगह है, समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba )
Samadhi Wale Baba – राजस्थान में स्थित मेहंदीपुर बालाजी ( Mehandipur Balaji ) के दर्शन करने दूर दूर से लोग आते हैं. इसी पावन धरती पर स्थित है समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) का मंदिर. कहते हैं कि समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) के दर्शन किए बिना मेहंदीपुर बालाजी की यात्रा पूरी नहीं होती है. मेहंदीपुर बालाजी ( Mehandipur Balaji ) में भक्तों के संकट कटते हैं. भूत-पिशात, किसी का किया कराया होता हो तो यहाँ आकर सभी तरह के दुख कट जाते हैं. मेहंदीपुर बालाजी ( Mehandipur Balaji ) एक ऐसा मंदिर है, जहां दर्शन मात्र से ही सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ( Mehandipur Balaji Mandir ) में किसी तरह का भी चढ़ावा मान्य नहीं है. हाँ, अर्ज़ी, सवामणी, इत्यादि की एक निश्चित प्रक्रिया ज़रूर है. हमने, मेहंदीपुर बालाजी ( Mehandipur Balaji ) के अपने पिछले ब्लॉग में, आपको मंदिर और वहाँ के नियम से जुड़ी सभी जानकारियाँ दी थीं. पिछले ब्लॉग को आप इस लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं.अब आइए हम आपको बताते हैं समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) के बारे में.
इस आर्टिकल में, हम आपको मेहंदीपुर बालाजी ( Mehandipur Balaji ) में मौजूद एक और धार्मिक जगह के बारे में बताने जा रहे हैं. ये धार्मिक जगह है, समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ). समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ), मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ( Mehandipur Balaji Mandir ) के पहले महंत रहे हैं. इसी वजह से, समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) के दर्शन किए बिना मेहंदीपुर बालाजी ( Mehandipur Balaji Mandir ) की यात्रा पूरी नहीं मानी जाती है. इसके बाद, अगर आप चाहें तो तीन पहाड़ी मंदिर ( Teen Pahadi Mandir ) भी जा सकते है. मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ( Mehandipur Balaji Mandir ) जाने पर, तीन पहाड़ी मंदिर ( Teen Pahadi Mandir ) से आपको पूरी घाटी दिखाई देती है. यहीं से आपको हरिसोना धर्मशाला ( Hari Sona Dharamshala in Mehandipur Balaji ) में बनी हनुमान जी की विशालकाय 151 मीटर की मूर्ति भी दिखती है. इस आर्टिकल में, आइए जानते हैं समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) की महिमा और वहाँ दर्शन करने के नियम.
समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) का नाम गणेशपुरी जी महाराज ( Ganeshpuri Ji Maharaj ) है. वह मेहंदीपुर बालाजी में, पहले महंत रहे हैं. ऐसा कहा जाता है कि बालाजी मंदिर की प्रसिद्धि बढ़ाने और उनके चमत्कारों को जन जन तक इन्हीं ने पहुँचाया था. कई लोग तो यहाँ तक कहते हैं कि समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) की बदौलत ही मेहंदीपुर बालाजी मंदिर को बेहद ज़्यादा ख्याति मिल पाई है. जब भी आप मेहंदीपुर बालाजी की यात्रा पर आते हैं तो आपको समाधि वाले बाबा ज़रूर जाना चाहिए. समाधि वाले बाबा पर जाकर क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसकी जानकारी इस ब्लॉग में आपको मिलेगी
समाधि वाले बाबा, मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ( Teen Pahadi Mandir ) से कुछ ही दूरी पर स्थित हैं. बालाजी मंदिर में दर्शन के बाद, आप पैदल चलकर यहाँ पहुँच सकते हैं. आपको कोई भी यहाँ का रास्ता बता देगा. अगर समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) आपकी विनती सुन लेते हैं तो समझ लीजिए कि आपके कष्ट कट गए. ये तो आप भी जानते हैं कि सच्चे मन से जो भक्त यहाँ आता है, उसकी मनोकामना पूरी ज़रूर होती है.
समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) को जलेबी का भोग ( Jalebi Ka Bhog ) लगता है. ये भोग आपको, स्थल के बाहर मिल जाता है. ये भोग सिर्फ़ 10 रुपये में मिलता है. समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) स्थल से बाहर आप 10 रुपये में जलेबी का भोग ख़रीद सकते हैं. ऐसा कहते हैं कि बाबा को जलेबी का भोग बेहद पसंद है.
जब भी आप समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) जाएँ, भोग के समय का ख़ास ध्यान रखें. ज़्यादातर भक्त सुबह के वक़्त ही इसको सही मानते हैं. हालाँकि आप दोपहर साढ़े 12 बजे तक भोग लगा सकते हैं. ऐसे लोग, जिनपर संकट है या वे लोग जिनपर संकट नहीं है, वे भी 10 रुपये की जलेबी का भोग यहाँ ज़रूर लगाएं.
समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) को भोग लगाने के बाद थोड़ी सी जलेबी निकालकर हाथ में रखें. इस जलेबी को अपने सिर से सात बार वारें. 7 बार अपने सिर से इसे घुमाने के बाद, प्रेम और आस्था के साथ इसे उस जगह पर रख दें जहां दूसरे भक्त इसे रख रहे हों. वैसे तो उसे घुमाकर पीछे की तरफ़ उछाल भर देना होता है.
आपने भोग लगाने के बाद जिस जलेबी को निकाला है उसे ख़ुद ही खाएँ. दूसरे किसी भी शख्स को न खिलाएँ.
भोग की प्रक्रिया पूरी करने के बाद आपको समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) की सात परिक्रमा करनी चाहिए. इस परिक्रमा को कई लोग लेटकर भी पूरा करते हैं. समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) स्थल पर, व्याधि से ग्रसित कई लोग बाबा के दरबार में मत्था टेके मिल जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि बाबा की परिक्रमा करने से संकट ज़रूर कट जाते हैं. समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) की परिक्रमा के दौरान, मन में समाधि वाले बाबा की जय बोलते चलिए.
ऐसे लोग, जिनकी पेशी न खुल रही हो या संकट न कट पा रहा हो, उन्हें 10 रुपये की एक दरख्वास्त भी लगानी चाहिए. ऐसा करते समय, बाबा से विनती करनी चाहिए कि बाबा हमारी पेशी खोल दीजिए और संकट काट दीजिए. दरख्वास्त में, आप ख़ुद का पूरा नाम और पता ज़रूर बोलें. इसके बाद समाधि वाले बाबा ( Samadhi Wale Baba ) के स्थान के पास कोई खाली जगह देखकर बैठ जायें और बाबा का ध्यान करें आपको निश्चित ही इसका असर दिखेगा.
इस ब्लॉग को पढ़ने वाले सभी लोगों से विनम्र अनुरोध है कि जब भी आप मेहंदीपुर बालाजी ( Teen Pahadi Mandir ) जाएं, बाबा के दर्शन करें, प्रार्थना करें और पूरे नियम व विधि विधान के साथ ही भोग लगायें. अपनी इच्छा से या मन में आए किसी भी तरीक़े से कोई भोग न लगायें. भोग किसी भी तरह का क्यों न हो, ऐसे व्यक्ति से पूछकर ही लगाएँ जो बालाजी ( Teen Pahadi Mandir ) महाराज के सभी भोगों की जानकारी रखता हो.
कुछ भोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें सामान्य सी जानकारी के साथ लगाया जा सकता है जैसे अर्जी, दरखास्त और सवामनी आदि. आप इसे तो लगाएँ लेकिन बाक़ी दूसरे भोग लगाने से पहले अपने महंत से परामर्श ज़रूर करें. अगले ब्लॉग में, हम आपको बालाजी मंदिर ( Teen Pahadi Mandir ) में लगाए जाने वाले भोग के प्रकार बताएँगे और साथ ही उनकी जानकारी भी देंगे.
मेहंदीपुर बालाजी, समाधि वाले बाबा और तीन पहाड़ी मंदिर के दर्शन के लिए आप जब भी जाएँ, तो रहने, खाने या यात्रा से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी के लिए इस नंबर पर – 9871838528 या ई-मेल आईडी Gotraveljunoon@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं.
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