Siddhivinayak Mandir full information in Hindi
SiddhiVinayak Mandir – देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में बने विशाल सिद्धिविनायक मंदिर ( SiddhiVinayak Mandir ) भगवान गणेश को समर्पित मंदिर है, इस मंदिर की गिनती देश के सबसे बड़े और व्यस्त धार्मिक स्थलों में की जाती है। भगवान गणेश के लिए यहां पर रोजाना हजारों की संख्या में देश और विदेश से लोग और पर्यटकों का आना लगा रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां पर सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूर ही पूरी होती है। वहीं सिद्धिविनायक मंदिर ( SiddhiVinayak Mandir ) को हर साल श्रद्धालुओं की तरफ से भारी दान दिया जाता है। इसलिए ये मंदिर देश के सबसे अमीर मंदिरों की सूची में शामिल है। यहां दर्शन करने के लिए बॉलीवुड सितारों से लेकर नेता, उद्योगपतियों का आना जाना लगा रहता है। खासकर गणेश चतुर्थी के दौरान यहां पर भक्तों का भारी जमावड़ा लगा रहता है। इस दौरान मंदिर में भव्य आयोजन किए जाते हैं।
भारत का मशहूर सिद्धिविनायक मंदिर का निर्माण 19 नवंबर 1801 को एक लक्ष्मण विथु पाटिल नाम के स्थानीय ठेकेदार के द्वारा करवाया गया था। बहुत कम लोग ही इस बात को जानते हैं कि इस मंदिर को बनाने में लगने वाला पैसा एक कृषक महिला ने दी थी, जिसकी कोई औलाद नहीं थी। वो इस मंदिर को बनवाने में मदद करना चाहती थी, ताकि भगवान के आशीर्वाद से कोई भी महिला बांझ न हो, सबको संतान की प्राप्ति हो। इस मंदिर में किसी को भी आने की मनाई नहीं है। सिद्धिविनायक मंदिर अपनी मंगलवार की आरती के लिए काफी ज्यादा प्रसिद्ध है जिसमें श्रद्धालुओं की कतार कभी-कभी 2 किलोमीटर से दूर निकल जाती है।
इस मंदिर को बनाने के पीछे का मुख्य कारण ये था कि गणपति निसन्तान महिलाओं को बच्चे होने का आशिर्वाद दें। रामकृष्ण जम्भेकर महाराज ने हिंदू संत अक्कलकोट स्वामी समर्थ के एक शिष्य ने अपने गुरु के आदेश पर मंदिर के इष्टदेव के सामने 2 मूर्तियों को दफन कर दिया था। स्वामी समर्थ के द्वारा भविष्यवाणी के रूप में अंत्येष्टि के 21 साल के बाद मंदार पेड़ की अपनी शाखाओं में एक स्वयम्भू गणेश की उस स्थान पर वृद्धि हुई।
सिद्धिविनायक मंदिर की शुरुआती संरचना पहले काफी छोटी थी, जिसका आकार 3.6 मीटर X 3.6 मीटर वर्ग का था। प्रारंभिक संरनचा में सिर्फ ईंटों का ही इस्तेमाल किया गया था, जिसका गुंबद आकार का शिखर भी था। इसके बाद में इस मंदिर का पुननिर्माण कर आकार को बढ़ाया गया था।
मंदिर के साथ एक छोटा सा मंडप है। गर्भगृह या मुख्य द्वार के लिए लकड़ी के दरवाजे पर अष्टविनायक की छवियों के साथ खुदा हुआ है। गर्भगृह के अंदर की छत को सोने से बनाया गया है और केंद्रीय मूर्ति भगवान गणेश की है।
गणपति यहां पर चार हाथों में दिखाए गए हैं, एक हाथ में कमल, एक कुल्हाड़ी, एक लड्डू और मोतियों की माला है। वहीं उनकी पत्नियों सिद्धि और रिद्धि से वो घिरे हुए दिखाए गए है। ऐसा माना जाता है कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा काले पत्थर से बनाई गई है, जिसकी सूंड दाई तरफ है। ये प्रतिमाएं देखने में काफी ज्यादा आकर्षक लगती हैं और इस मंदिर के दर्शन करना शुभ माना जाता है।
क्या आपको पता है कि इस मंदिर को सिद्धिविनायक क्यों कहा जाता है? आपको बता दें कि सिद्धिविनायक भगवान गणेश का सबसे लोकप्रिय रूप रहा है, जिसमें उनकी सूंड दाईं तरफ मुड़ी होती है, और जानकारी के मुताबित गणेश की ऐसी प्रतिमा वाले मंदिर सिद्धपीठ कहलाते हैं और इसलिए इसे सिद्धिविनायक मंदिर कहा गया है। ऐसा माना जाता है सिद्धिविनायक सच्चे मन से मांगी गई भक्तों की इच्छा जरूरी पूरी करते हैं। वहीं आपको बता दें कि सिद्धिविनायक मंदिर की गिनती भारत के सबसे अमीर मंदिरों में की जाती है। जानकारी के मुताबिक मंदिर में हर साल 100 मिलियन से 150 मिलियन धनराशी दान के रूप में दी जाती है। इस मंदिर की देखरेख करने वाली संस्था मुंबई की सबसे अमीर ट्रस्ट है। सिद्धिविनायक को एक लोकप्रिय मंदिर के रूप में देखा जाता हैं जहां दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं के अलावा राजनेता, बॉलीवुड स्टार, बड़े उद्योगपतियों का भी आना लगा रहता है। कई बड़े लोग शुभ काम से पहले यहां पर आशिर्वाद लेने के लिए आते हैं। सिर्फ भारत के ही नहीं बल्कि इस मंदिर में दर्शन के लिए टिम कुक जो कि ऐप्पल के सीईओ रहे भी आए हैं।
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