जिसे लाल किले पर फहराया गया, उस Nishan Sahib का मतलब क्या है

nishan sahib – 26 जनवरी 2021, गणतंत्र दिवस के दिन राजधानी दिल्ली और एनसीआर के कई इलाके उपद्रव की चपेट में आ गए. हंगामें और हिंसा के बीच, लाल किले पर सिख धर्म के ध्वज को फहरा दिया गया. किसान आंदोलन की आड़ में, कुछ लोगों ऐसा किया. आइए जानते हैं कि सिख धर्म के जिस ध्वज ( nishan sahib ) को लाल किले पर फहराया गया, वो कहता क्या है.

दरअसल, खंडा चिह्न ( पंजाबी में ਖੰਡਾ ) एक धार्मिक, सांस्कृतिक, एवं ऐतिहासिक चिह्न है. यह सिख धर्म को दर्शाता है. यह “देगो-तेगो-फ़तेह” के सिद्धांत का प्रतीक है. इसे चिह्नात्मक रूप में पेश करता है. यह सिखों का फ़ौजी निशान भी है. आपने देखा होगा कि भारतीय सेना की सिख रेजिमेंट, इस ध्वज को साथ लेकर चलती है.

खास तौर से, इसे निशान साहब ( nishan sahib ) (सिखों का धार्मिक ध्वज) के रूप में देखा जाता है. इसमें चार शस्त्र अंकित होते हैं: एक खंडा, दो किर्पाण और एक चक्र. खंडा की एक विशेष पहचान यह भी है कि वह धार्मिक सिद्धांतों के साथ-साथ शक्ति एवं सैन्य-ताक़त का भी प्रतीक है. यही वजह है कि इसे खालसा, सिख मिस्लें एवं सिख साम्राज्य के सैन्यध्वजों में भी प्रदर्शित किया जाता था. एक दोधारी खंडे (तलवार) को निशान साहब ध्वज ( nishan sahib ) में ध्वजडंड के कलश (ध्वजकलश) की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है.

खंडा निशान तीन चिह्नों का संयोजन है:

केंद्र में एक दोधारी खंडा (तलवार) है. इस दोधारी अस्त्र की धार, प्रतीकात्मक तौर पर अच्छाई को बुराई से अलग करती है. खंडा का इस्तेमाल, अमृत संस्कार क्रिया (सिख नामकरण संस्कार) के समय पवित्र जल (अमृत) के सरग्रमण (मिलाना) के लिये भी किया जाता है.

एक चक्र, (पंजाबी: ਚਕ੍ਕਰ; चक्कर): जो स्वयं असीम, अनंत, निराकार, परमेश्वर का प्रतीक है. इसका वृत्ताकार अनादि परमात्मा के स्वरूप को दर्शाता है, जिसका न कोई आदि है ना ही कोई अंत होता है.

दो किर्पाण (मुड़े हुए एकधारी तलवार) जो मीरी और पीरी भावों का चित्रण करते हैं. यह आध्यात्म और राजनीति के समन्वय के प्रतीक हैं जो सतगुरु हरगोबिंदजी साहब के समय से इस्तेमाल में है. यह चिह्न लौकिक एवं अलौकिक संप्रभुताओं की एकता एवं समन्वय को दर्शाता है.

प्रदर्शन

इस चिह्न ( nishan sahib ) को अकसर व्यक्तिगत वाहनों पर, कपड़ों पर और अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं पर अंकित किया जाता है, एवं इसे प्रचलित रूप से पेंडन्ट के रूप में भी पहना जाता है. खंडा चिह्न को अक्सर लोग ईरान के ध्वज पर बने निशान से उलझा देते हैं, जबकी इन चिह्नों का आपस में कोई मेल नहीं है. यूनिकोड लीप्यावली में स्थानांक U+262C(☬) पर खंडा चिन्ह मौजूद है.