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Rapid Rail Corridor के लिए राज्य सरकार ने दी 100 करोड़ रुपये की मंजूरी

राज्य सरकार ने दिल्ली, गाजियाबाद-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर Rapid Rail Corridor के निर्माण के लिए हरी झंडी दे दी है. सरकार ने इस ( Rapid Rail Corridor ) परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है.

इस (Rapid Rail Corridor) परियोजना में पैसा राज्यांश के रूप में दिया गया है. इस सम्बंध में प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार ने सोमवार को एक आदेश भी जारी कर दिया है. जिसके चलते इस संबंध में प्रबंध निदेशक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम को पत्र भी भेज दिया है.

बताया जा रहा है कि रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (Rapid rail transit system) परियोजना में राज्यांश के तौर पर करीब 900 करोड़ रुपये दिया जाना है.

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उन्होंने जानकारी देते हुए ये भी बताया कि इस (Rapid Rail Corridor) परियोजना के सभी कामों को निर्धारित व तय मानकों के आधार पर पूरा किया जाएगा. इस रैपिड रेल परियोजना (Rapid Rail Corridor) की डीपीआर को केंद्र व राज्य सरकार पहले मंजूरी दे चुकी है. इसलिए इसकी सभी शर्तों का पुरी तरह से ध्यान रखा जाएगा,

इसके निर्माण कार्य में किसी तरह की अनदेखी नहीं की जाएगी. सरकार द्वारा आवंटित किए गए पैसे को 31 मार्च 2021 तक अनिवार्य रूप से खर्च करना होगा. जिसके इन पैसों को खर्च करने का उपयोगिता प्रमाण पत्र 30 अप्रैल 2021 तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा.

साथ ही साथ Rapid Rail Corridor परियोजना के लिए बचे पैसे की मांग भी उपयोगिता प्रमाण पत्र के साथ करनी होगी. इस पैसे को निर्धारित समय में ही खर्च किया जाएगा और इसे किसी अन्य कामों पर खर्च नहीं किया जाएगा.

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मिली जानकारी के अनुसार इस ट्रेन की रफ्तार लगभग 180 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. जिससे दिल्ली से मेरठ तक का सफर सिर्फ एक घंटे में पूरा किया जा सकेगा.

 

Anchal Shukla

मैं आँचल शुक्ला कानपुर में पली बढ़ी हूं। AKTU लखनऊ से 2018 में MBA की पढ़ाई पूरी की। लिखना मेरी आदतों में वैसी शामिल है। वैसे तो जीवन के लिए पैसा महत्वपूर्ण है लेकिन खुद्दारी और ईमानदारी से बढ़कर नहीं। वो क्या है कि मैं लोगों से मुलाक़ातों के लम्हें याद रखती हूँ, मैं बातें भूल भी जाऊं तो लहज़े याद रखती हूँ, ज़रा सा हट के चलती हूँ ज़माने की रवायत से, जो सहारा देते हैं वो कंधे हमेशा याद रखती हूँ। कुछ पंक्तिया जो दिल के बेहद करीब हैं। "कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हँसे हम रोये ऐसी करनी कर चलो, हम हँसे जग रोये"

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