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world’s longest highway, Atal Tunnel बनकर तैयार, जानें खासियतें

दुनिया की सबसे लंबी रोड टनल ( Atal Tunnel ) भारत में बनकर तैयार हो गई है. 10 हजार फीट पर स्थित इस टनल का नाम है ( Atal Tunnel ). इसे बनाने में करीबन 10 साल लगे, पर अब जब ये बनकर तैयार हो गई है तो सारी दुनिया की निगाहें इस पर हैं. हो भी क्यों ना, ये इतनी शानदार जो है.

इस टनल से अब लद्दाख पूरे साल देश के दूसरे हिस्सों से जुड़ा रहेगा. इसके कारण मनाली से लेह के बीच 46 किलोमीटर की दूरी कम हो गई है. इस टनल का नाम पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर है. इस टनल ( Atal Tunnel ) की फोटोज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं.

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2010 में हुआ था टनल बनने का काम शुरू

टनल का शिलान्यास साल 2010 में किया गया था. 2015 तक टनल ( Atal Tunnel ) का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सेरी नाले में हुए पानी के रिसाव और इसे रोकने के लिए करीब ढाई साल का वक्त लग गया. पानी काे रोकने के लिए एक चैनल बनाना पड़ा.

शुरुआत में टनल ( Atal Tunnel ) निर्माण की लागत करीब 16 सौ करोड़ थी. लेकिन, इस टनल को बनाने में करीब दस साल का समय लग गया और अब 20 सितंबर तक टनल का निर्माण कार्य पूरा होने वाला है और अब इस टनल की लागत 35 सौ करोड़ रुपए तक जा पहुंची है. यह पहले निर्धारित बजट से दो गुना ज्यादा है.

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मनाली और लेह की दूरी हुआ कम

टनल से मनाली और लेह की दूरी में 46 किलोमीटर कमी आएगी. टनल हिमाचल प्रदेश में मनाली के पास समुद्रतल से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित पहाड़ को भेदकर बनाई गई है. पहले राेहतांग टनल के नाम से बनाई जा रही थी, लेकिन बाद में इसका नामकरण अटल रोहतांग टनल किया गया.

इस टनल का निर्माण साल 2010 से बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने शुरू किया. सर्दियों के दौरान माइनस 23 डिग्री सेल्सियस में बीआरओ के इंजीनियर, मजदूरों ने इसके निर्माण को अंजाम दिया.

Why Atal Tunnel is Important?

10,171 फीट की ऊंचाई पर बनी है. रोहतांग पास से इसे जोड़कर बनाया गया है. यह दुनिया की सबसे ऊंची और सबसे लंबी रोड टनल है.करीब 8.8 किलोमीटर लंबी है, 10 मीटर चौड़ी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे.

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कब से शुरू हुआ काम

साल 2003 में सुरंग की आधारशिला रखी गई थी. इसकी मदद से लाहौल-स्पीति के बीच सभी तरह के मौसम में सड़क यातायात सुगम हो जाएगा और इससे पर्यटन में भी गति आएगी क्योंकि इससे पहले ठंड में देश के बाकी हिस्सों से यहां का संपर्क टूट जाता था.

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