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मुगलों का ( Harem ) हरम अंदर से कैसा था? नियम सुनकर सिहर जाएंगे ?

बाबर, हुमायूं, अकबर और जहांगीर जैसे मुगल शासकों ने हमारे देश में कई सालों तक राज किया। मुगल शासकों ने भारत में सांस्कृतिक विकास का प्रसार किया। लेकिन, मुगलकाल की कई ऐसी बातें हैं, जिसे जानने की उत्सुकता बनी रहती है। और उसमें से एक है ( Harem ) हरम। कैसा था ( Harem ) हरम? कैसी थी ( Harem ) हरम में महिलाओं की जीवन शैली? तो चलिए आपको बताते हैं मुगल काल के शाही ( Harem ) हरम की कहानी।

क्या है हरम ?:  ( Harem ) हरम यानी की शाही महिलाओं के रहने का एक अलग स्थान। जहां पर पुरूषों को जाने की इजाजत नहीं थी। प्राचीन काल से ही इसका जिक्र हमें समकालीन स्त्रोतों में मिलता है। हरम अरबी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है छिपा हुआ स्थान। समय के साथ- साथ इसका प्रयोग महिला कक्ष के लिए होने लगा। हिंदी में हरम का मतलब महल- सरा, संस्कृत में अन्तापुरा होता है। अबुल फजल ने अकबरनामा और आइन-ए- अकबरी जैसी प्रसिद्ध पुस्तक की रचना की…अबुल फजल ने आइन-ए-अकबरी में हरम का जिक्र किया है, लेकिन उन्होंने इसके लिए स्बीस्थान-ए- इकबाल शब्द का प्रयोग किया है। अबुल फजल अकबर के नवरत्नों में से एक रत्न थे ।

कहां- कहां थे मुगलों के शाही हरम?: प्रथम मुगल बादशाह बाबर से लेकर बहादुरशाह जफर तक ने हरम स्थापित किए। लेकिन मुगल हरम का सही रूप अकबर से शुरू हुआ जो जहांगीर के समय में अपने चरम पर पहुंचा। हालांकि औरंगजेब के साथ ही मुगल हरम अपनी पहचान खोता चला गया। क्योंकि, इसके बाद मुगल शासन का पतन हो चुका था। मुगल काल में कई जगहों पर शाही हरम थे। जैसे दिल्ली, आगरा, फतेहपुर सिकरी और लाहौर में। इसके अलावा अहमदाबाद, बुहरानपुर, दौलताबाद, मान्छू और श्रीनगर में भी हरम स्थापित किए गए थे।

शाही हरम में कितनी महिलाएं रहती थी?: अबुल फजल की किताब के मुताबिक शहंशाह अकबर के हरम में 5 हजार महिलाएं थी, हालांकि इससे पहले के दो बादशाहों के समय में ये संख्या 300 और 400 से ज्यादा नहीं थी। लेकिन, औरंगजेब के समय में हरम में महिलाओं की संख्या बहुत कम थी।

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हरम की कार्यप्रणाली: शाही हरम के लिए भी एक प्रशासनिक व्यवस्था थी। इस व्यवस्था के लिए ज्यादातर महिलाएं होती थी। हरम की सुरक्षा को लेकर अकबर ज्यादा संजीदा रहते थे, क्योंकि, बादशाह खुद हरम में सोने के लिए जाते थे। वहीं खाना भी खाते थे, यहां की कार्यप्रणाली एक विभाग की तरह होती थी। वहां पर सभी काम करने वालों का मेहनताना निश्चित होता था। इसमे सबसे ज्यादा वेतन दारोगा का होता था, उसे एक हजार से 1500 रुपये महीना मिलता था, जबकि साधारण नौकर को 2 से 51 रुपये महीना वेतन दिया जाता था। हरम पर कब- कब कितना खर्च हुआ इसका हिसाब खजांची रखता था। वहीं अगर हरम में किसी नौकर को ज्यादा पैसे की जरूरत होती थी, तो वो थवीलदार से संपर्क स्थापित करता था। फिर थवीलदार खजांची को खत भेजता था, उसके बाद नौकर को जरूरत के आधार पैसा मिलता था।

शाही हरम की सुरक्षा: शाही हरम की सुरक्षा इतनी चाक-चौबंद होती थी कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। अबुल फजल के मुताबिक हरम की सुरक्षा सख्त रहती थी। अबुल फजल की किताबी के अनुसार शाही हरम में 5 हजार से ज्यादा महिलाएं रहती थी। अकबर ने महल को कई कक्षों में बांट रखा था। और हर कक्ष विशेष पहरे में रहता था। शाही हरम के अंदर सबसे विश्वासपात्र महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती होती थी। जबकि हरम के पास में किन्नरों की टुकड़ी तैनात रहती थी। बता दें कि उस समय किन्नर हथियार चलाने में भी निपुण होते थे। जो किन्नर सुरक्षा के लिए रखे गए थे, वो किसी भी योद्धा को मारने की क्षमता रखते थे। इसके साथ ही किन्नरों को रखने की एक खास वजह ये भी थी कि वो रानियों की सेवा में लगे रहते थे, और उनका खास ध्यान भी रखते थे। हरम के सबसे बाहरी घेरे में विश्वासपात्र पहरेदारी करते थे, जबकि उनके आगे प्रवेशद्वारों पर द्वारपाल होते थे। हरम की दीवारों के बाहर एकल सिपाही और दूसरी सैन्य टुकड़ी गश्त लगाया करती थी। इनके अलावा अकबर खुद भी हरम की निगरानी रखते थे।

शाही हरम के कठोर नियम: हरम जितना शाही था उससे कहीं ज्यादा हरम में कड़े नियम थे। हरम के अंदर रहने वालों को बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। अगर किसी वजह से बाहर जाना भी पड़े तो उन्हें पर्दा रखना जरूरी होता था। हालांकि हरम के अंदर किसी भी चीज की कमी नहीं थी। कई आराम देने वाली सुविधाएं थी। यूरोपियन यात्री ब्रनियर और मनुकी ने भी अपनी रचनाओं में शाही सुविधाओं का जिक्र किया है। उनकी रचनाओं के मुताबिक हरम के अंदर मौजूद महिलाओं को शाही सुविधाएं मिलती थी। यहां की महिलाएं महंगे कपड़े, महंगे जेवर पहना करती थी। इनके कक्ष बड़े आरामदायक होते थे। इनका खाना शाही रसोई से आता था। गर्मियों में ठंडे पानी की विशेष व्यवस्था भी होती थी।

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कैसे बीतता था दिन?: जब शाही हरम की महिलाओं को बाहर जाने की इजाजत नहीं थी तो उनका ज्यादातर वक्त हरम में ही बीतता था। ऐसे में सवाल ये की वहां की महिलाओं का मनोरंजन कैसे होता था। हरम में महिलाओं के मनोरंजन के लिए पूरे प्रबंध किए जाते थे। वैसे तो हरम की महिलाएं अपना ज्यादातर समय सजने- संवरने में बिताती थी। हरम के अंदर नाचने वाली और गाने वाली अनेक महिलाएं होती थी। हरम के अंदर किताबें भी रखी होती थी। इसके अलावा हरम की महिलाएं स्थापत्य कला, बाग लगाने और व्यापारिक गतिविधियों में भी हिस्सा लेती थी।

कैसा होता था महिलाओं का स्तर?: मुगलकालीन महिलाओं का सारा जीवन शहंशाह के प्रभाव में ही कटता था। हरम की सभी महिलाओं की स्थिति एक जैसी नहीं थी। उनकी स्थिति और स्तर शहंशाह ही निश्चित करते थे। बादशाह की पत्नियों में सभी के लिए सम्मान की बात होती थी, पहले बेटे को कौन जन्म देगा। क्योंकि उस रानी का हरम में सम्मान बढ़ जाता था। हरम में किसी  की मौत होने से पहले ही जो महिला बीमार होती थी उसे बीमार खाने भेज दिया जाता था। हालांकि शाही महिलाओं के लिए ऐसा नहीं किया जाता था। हरम में अगर किसी महिला की कोख से बच्चा पैदा नहीं होता था, तो वो दूसरी महिला का बच्चा गोद ले सकती थी।

Sandeep Jain

पत्रकार की नजर से.....चलो घूम आते हैं