जामिया मिलिया के प्रोफेसर SM Akhtar तैयार करेंगे Ayodhya Masjid का डिज़ाइन

नई दिल्ली. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या में बनने वाली मस्जिद ( Ayodhya Masjid ) की डिज़ाइन जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रोफेसर एसएम अख्तर ( SM Akhtar ) तैयार करेंगे. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने प्रोफेसर एसएम अख्तर SM Akhtar को मस्ज़िद ( Ayodhya Masjid ) निर्माण के डिजाइन की जिम्मेदारी सौंपी है. यही नहीं, मस्जिद के साथ ही साथ उसके आसपास के अन्य भवनों की डिजाइन तैयार भी प्रोफेसर एसएम अख्तर SM Akhtar ही तैयार करेंगे. इसकी देखरेख का जिम्मा इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन दिया गया.

प्रोफेसर एसएम अख्तर SM Akhtar का मानना है कि इस्लाम या किसी अन्य धर्म का दर्शन मानवता की सेवा करना ही है और यही हमारा पहला उद्देश्य होगा. उन्होंने कहा कि हमारा यह प्रयास रहेगा कि समाज की सेवा के लिए सभी हम सभी एक साथ आ सके. हमारा मकसद देश में एकजुटता बढ़ाने का है. देश में सद्भाव बनाने का. जिसके बाद ही अयोध्या में पांच एकड़ के भूखंड पर मस्जिद के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा गठित एक ट्रस्ट इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) इस काम की देखरेख करेगा.

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पिछले साल नौ नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में फैसला सुनाते हुए विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण करने और मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में अन्य स्थान पर पांच एकड़ जमीन देने का फैसला सुनाया था.  फैसला सुनाने के बाद प्रशासन की ओर से अयोध्या जिले की सोहावल तहसील स्थित धन्नीपुर गांव में पांच एकड़ जमीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए दी गई.

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अयोध्या की मस्जिद के ट्रस्ट, इंडो इस्लामिक कल्चर फाउंडेशन का बैंक अकाउंट भी बीते शनिवार को खोल दिया गया. ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन का कहना है कि मस्जिद निर्माण के लिए दो बैंक अकाउंट खोले गए हैं. जिसमें से एक अकाउंट में मस्जिद के लिए आर्थिक सहयोग की राशि जमा की जाएगी, जबकि दूसरे अकाउंट में हॉस्पिटल, कल्चरल सेंटर और किचन के लिए पैसा जमा करने की व्यवस्था की गई है. आईआईसीएफ के सचिव ने जानकारी देते हुए बताया है कि जल्द ही मस्जिद ट्रस्ट का पोर्टल भी लॉन्च कर दिया जाएगा. जो लगभग तैयार भी हो गया है. उन्होंने बताया कि आर्थिक सहयोग की राशि के आधार पर मस्जिद परिसर में निर्माण शुरू करने की योजना की गई है. जिसके चलते बैंक अकाउंट नंबरों व इनके आईएफएससी कोड को भी सार्वजनिक कर दिया गया है. जिससे लोग आर्थिक तौर पर मदद करने के लिए अपना योगदान कर सकते हैं.

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प्रोफेसर एसएम अख्तर SM Akhtar ने बताया कि बोर्ड ने अयोध्या के धन्नीपुर गांव में आवंटित की गई पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद के साथ ही साथ भारत-इस्लामी शोध केंद्र, लाइब्रेरी और अस्पताल का निर्माण भी किया जाएगा। इस निर्माण कार्य के लिए ही ‘इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन’ नाम से एक ट्रस्ट बनाया है. जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा.

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जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) में आर्किटेक्ट विभाग के प्रमुख एसएम अख्तर SM Akhtar ने बताया  कि हज़ार से भी ज़्यादा आर्किटेक्ट मेरे छात्र रह चुके हैं और मेरे यही स्टूडेंट्स दुनिया भर में फैले हुए हैं. वः भी मेरे साथ इस निर्माण कार्य में सहयोग कर सकते हैं. मस्जिद निर्माण पर काम करने का विकल्प मेरे वर्तमान छात्रों के लिए भी खुला रहेगा अगर वो चाहें तो इस दौरान बहुत कुछ सीख सकते हैं. स्टूडेंट्स के लिए ये सीखने का बेहतरीन अनुभव रहेगा.

प्रोफेसर अख्तर को इस क्षेत्र में कई सालों का अनुभव है. प्रोफेसर अख्तर ने विश्वविद्यालय के कंप्यूटर केंद्र, उसमें बने हुए अस्पताल और यहां तक ​​कि वहां की वास्तुकला भवन का भी डिजाइन तैयार किया है. अपने बेहतरीन अनुभव के चलते उन्होंने स्थानीय क्षेत्र की योजनाओं के लिए दिल्ली सरकार के साथ भी काम किया है.

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Anchal Shukla

मैं आँचल शुक्ला कानपुर में पली बढ़ी हूं। AKTU लखनऊ से 2018 में MBA की पढ़ाई पूरी की। लिखना मेरी आदतों में वैसी शामिल है। वैसे तो जीवन के लिए पैसा महत्वपूर्ण है लेकिन खुद्दारी और ईमानदारी से बढ़कर नहीं। वो क्या है किमैं लोगों से मुलाक़ातों के लम्हें याद रखती हूँ,मैं बातें भूल भी जाऊं तो लहज़े याद रखती हूँ,ज़रा सा हट के चलती हूँ ज़माने की रवायत से,जो सहारा देते हैं वो कंधे हमेशा याद रखती हूँ।कुछ पंक्तिया जो दिल के बेहद करीब हैं।"कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हँसे हम रोयेऐसी करनी कर चलो, हम हँसे जग रोये"